आग हम ने नहीं लगाई है
बस चराग़ों की लौ बढ़ाई है
छोड़ आई है घर पे तू और तुम
घर से बाहर वो आप लाई है
ख़ास बातें हज़ार थी उस में
जिन में से एक बे-वफ़ाई है
मैं ने सिगरेट तो छुपा ली थी
पर तेरी याद ढूँढ़ लाई है
अब किसी का भला न करना दोस्त
अब इसी में तेरी भलाई है
— Vineet Dehlvi















