सुन के फ़रमान शाह-ए-आलम का

रंग उतरा हुआ है आदम का

टाट का ये जहान है सारा
इस
में पैबंद है तू रेशम का

फूल बनने का फ़ायदा ये है
गाल चूमा है हम ने शबनम का

तेरी यादों के अब्र में जानाँ
है धनक मोजिज़ा मेरे ग़म का

उस से मिलने चिनाब आएगी
ख़्वाब कितना बड़ा है झेलम का

हमें दुनिया में भेजने वाला
असली हक़दार है जहन्नम का

— Vishnu virat

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