दुनिया से मोहब्बत अब यार हम नहीं करतेअब किसी को शिद्दत से प्यार हम नहीं करतेइक हज़ार मुशरिक पर तीन सौ ही काफ़ी हैंऐसे वैसे लश्कर पर वार हम नहीं करते— Waseem Siddharthnagari