mere naqsh ko vo mitaane lage hain | मेरे नक़्श को वो मिटाने लगे हैं

  - ALI ZUHRI

मेरे नक़्श को वो मिटाने लगे हैं
मुझे ख़ाक में अब मिलाने लगे हैं

मेरी ज़िन्दगी को कहानी समझ कर
वो किरदार ख़ुद से बनाने लगे हैं

मोहब्बत से जिनको कभी मसअला था
वो उलफ़त की बातें सिखाने लगे हैं

मेरे ख़्वाब में अब वो आते हैं अक्सर
मुझे नींदस भी जगाने लगे हैं

ग़ज़ब उनको मालूम है वसवसों का
सो यादों के ख़ंजर चलाने लगे हैं

खुरचने लगे हैं यूँँ वाबस्तगी अब
लकीरें भी अपनी मिटाने लगे हैं

  - ALI ZUHRI

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