रात रानी हो या चमेली हो
आशिक़ों के लिए पहेली हो
तारों के बीच चाँद हो तन्हा
ख़ूब-सूरत हो, पर अकेली हो
जौन की फ़ारिहा ख़याली हो
ग़ालिब ओ मीर की सहेली हो
इस तरह देखता हूँ तुम को मैं
जैसे दुल्हन नई नवेली हो
— ALI ZUHRI
आशिक़ों के लिए पहेली हो
तारों के बीच चाँद हो तन्हा
ख़ूब-सूरत हो, पर अकेली हो
जौन की फ़ारिहा ख़याली हो
ग़ालिब ओ मीर की सहेली हो
इस तरह देखता हूँ तुम को मैं
जैसे दुल्हन नई नवेली हो
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