dil meraa jinki yaadon ka markaz banaa hua | दिल मेरा जिनकी यादों का मरकज़ बना हुआ

  - ALI ZUHRI

दिल मेरा जिनकी यादों का मरकज़ बना हुआ
उन मुस्कुराती झील सी आँखों का क्या हुआ

उसने मज़ाक़ में कहा जाऊँगी छोड़ कर
सच हो रहा है देखो सब उसका कहा हुआ

ये ज़ख़्म ए हिज्र भी न बहुत ही अजीब है
जितना भी भरना चाहा ये उतना हरा हुआ

जब उसके दिल में उतरा तो तब ये पता चला
पहले से था वहाँ कोई नक़्शा बना हुआ

कब चाहता था होना मोहब्बत में मुब्तला
मुझ सेे ये काम भी हुआ तो बा ख़ता हुआ

हम थे के हो सके न मुयस्सर ख़ुदी को भी
वो थे के उनका यारों ख़ुदा भी सगा हुआ

  - ALI ZUHRI

Zakhm Shayari

Our suggestion based on your choice

More by ALI ZUHRI

As you were reading Shayari by ALI ZUHRI

Similar Writers

our suggestion based on ALI ZUHRI

Similar Moods

As you were reading Zakhm Shayari Shayari