"अलविदा"

जो सपने सजाए बरसों
उन के बिखरने का वक़्त आ गया
अलविदा ऐ दोस्त
मेरे मरने का वक़्त आ गया

मुज़्दा-ए-इशरत-ए-अंजाम मिला है
अब जा कर कहीं मुझे आराम मिला है
हद्द बहुत की हम ने
हद्द से गुजरने का वक़्त आ गया
अलविदा ऐ साथी
मेरे मरने का वक़्त आ गया

क़स
में वादे मैं तोड़ के जा रहा हूँ
साथ सभी का मैं छोड़ के जा रहा हूँ
हर वादे से अपने
अब मुकरने का वक़्त आ गया
अलविदा ऐ सखा
मेरे मरने का वक़्त आ गया

— Vikas Sangam

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