होगा हम को फिर किसी से प्यार तो हम फिर कहेंगे घुटनों के बल बैठ कर इज़हार उल्फ़त का करेंगेहाँ रक़ीबा हैं बहुत तो कौन हम को रोक पायादेशी दीवाने हैं हम तो और देशी ही रहेंगे— Yogamber Agri