तू है जिस को यूँ मुयस्सर कौन है
वो मुक़द्दर का सिकंदर कौन है
ज़ुल्म पर चुप रहने वाले ख़ुद से पूछ
अस्ल में तेरा सितमगर कौन है
देखना हो गर कोई दिलदार शख़्स
तो ये देखो ग़म का ख़ूगर कौन है
बस इसी में है तुम्हारी बेहतरी
सोचना मत तुम से बेहतर कौन है
जिस्म हो सकता नहीं उल्फ़त की शर्त
आज कल ये मानता पर कौन है
मेरे बाहर मैं हूँ जो सब को दिखे
कौन जाने मेरे भीतर कौन है
जिस में जा मिलना है मुझ दरिया को 'ज़ान'
पूछना था वो समुंदर कौन है
— Zaan Farzaan














