कि जीवन का हर इक नज़ारा समझतेफ़क़त तुम जो मेरा इशारा समझतेसमझते अगर मुझ को अपना कभी तुमतो मुझ जैसे जुगनू को तारा समझते— Shubham Rai 'shubh'