जहाँ से हुआ थाशुरूअ'सफ़रदेखा वहाँ कोई नहीं थासामने थामुंतज़िर सहरा सफ़र काऔर साए ख़ार-दारदेखते रुकते ठीक वैसे हीजो मेरे आगे के पाएदानों पर खड़ेसायों नेसोचा चाहा और कियामैं जो उन का पेश-रौ हूँ— Aadil Raza Mansoori