hamesha zindagi ki har kamii ko jeete rahte hain | हमेशा ज़िंदगी की हर कमी को जीते रहते हैं

  - Aalok Shrivastav

हमेशा ज़िंदगी की हर कमी को जीते रहते हैं
जिसे हम जी नहीं पाए उसी को जीते रहते हैं

हमारे दुख की बारिश को कोई दामन नहीं मिलता
हमारी आँख के बादल नमी को जीते रहते हैं

किसी के साथ हैं रस्में किसी के साथ हैं क़स
में
किसी के साथ जीना है किसी को जीते रहते हैं

हमें मालूम है इक दिन भरोसा टूट जाएगा
मगर फिर भी सराबों में नदी को जीते रहते हैं

हमारे साथ चलती है तुम्हारे प्यार की ख़ुशबू
लगाई थी जो तुम ने उस लगी को जीते रहते हैं

चहकते घर महकते खेत और वो गाँव की गलियाँ
जिन्हें हम छोड़ आए उन सभी को जीते रहते है

ख़ुदा के नाम-लेवा हम भी हैं तुम भी हो और वो भी
मगर अफ़सोस सब अपनी ख़ुदी को जीते रहते हैं

  - Aalok Shrivastav

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