कैसे कह सकते हो बुरा हूँ मैं
आइना रोज़ देखता हूँ मैं
अच्छा माशूक़ बन नहीं सकता
कुछ ज़ियादा ही सोचता हूँ मैं
खिलखिला उठता है हर इक चेहरा
गुल के जब बीज रोपता हूँ मैं
— Aatish Indori
आइना रोज़ देखता हूँ मैं
अच्छा माशूक़ बन नहीं सकता
कुछ ज़ियादा ही सोचता हूँ मैं
खिलखिला उठता है हर इक चेहरा
गुल के जब बीज रोपता हूँ मैं
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