कुछ तो दिक़्क़त है ज़िंदगी के साथवरना दुख आते क्यूँ ख़ुशी के साथफूल ने मुझ को ये नसीहत दीज़िंदगी जीना बेख़ुदी के साथवक़्त को साँस लेने देता हूँनहीं चलता हूँ मैं घड़ी के साथयार मेरे लिए ये मुश्किल हैज़िंदगी जीना बे-दिली के साथचाहता था विराट हो जानाइस लिए चल पड़ा नदी के साथ— Aatish Indori