मन में जो भी है कहो बोझ उतर जाने दो
रात तो रोज़ गुज़रती है गुज़र जाने दो
यार इस बोझ ने तो थाम दिए हैं पहिए
रेलगाड़ी से ये सामान उतर जाने दो
चीज़ हर एक तुम्हें साफ़ दिखाई देगी
पानी मैला है अभी थोड़ा ठहर जाने दो
सुब्ह होते ही सफ़र पे ये निकल जाएगा
आज की रात परिंदे को ठहर जाने दो
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