अंत जाना है कहानी का अक़ब भी जानोबे-वफ़ा क्यूँ हुआ है इस का सबब भी जानोआज की तरह ही हर बार रहोगे असफलइश्क़ करते हो तो जतलाने का ढब भी जानो— Aatish Indori