अब नज़रअंदाज़ करने की भी आसानी नहीं
कौन सी सी जा है जहाँ मैं ज़ेर-ए-निगरानी नहीं
बात कर ऐ ख़ूब-सूरत शख़्स कोई बात कर
और साबित कर तुझे कोई परेशानी नहीं
हम गुज़ारिश पर गुज़ारा कर रहे है इन दिनों
तुझ से तुझ को छीन लेने की अभी ठानी नहीं
— Abbas Tabish
कौन सी सी जा है जहाँ मैं ज़ेर-ए-निगरानी नहीं
बात कर ऐ ख़ूब-सूरत शख़्स कोई बात कर
और साबित कर तुझे कोई परेशानी नहीं
हम गुज़ारिश पर गुज़ारा कर रहे है इन दिनों
तुझ से तुझ को छीन लेने की अभी ठानी नहीं
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