ek anjaane khaalipan ne gher rakha hai | एक अनजाने ख़ालीपन ने घेर रखा है

  - Darpan

एक अनजाने ख़ालीपन ने घेर रखा है
मुझको अजीब से दुश्मन ने घेर रखा है

कुछ को तो दुनिया भर की सब आज़ादी है,
कुछ को अपने ही आँगन ने घेर रखा है

लम्स पुराने जो भी थे सब भूल गया हूँ,
मुझको ऐसी नई छुअन ने घेर रखा है

घिरा हुआ हूँ उसकी यादों से कुछ ऐसे,
जैसे कमरे को चिलमन ने घेर रखा है

अक्सर अपने ही साए से घबराता है,
दर्पन को अब के 'दर्पन' ने घेर रखा है

दर्पन

  - Darpan

Mahatma Gandhi Shayari

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