Darpan
Darpan
Ghazal

एक अनजाने ख़ालीपन ने घेर रखा है

मुझ को अजीब से दुश्मन ने घेर रखा है

कुछ को तो दुनिया भर की सब आज़ादी है,
कुछ को अपने ही आँगन ने घेर रखा है

लम्स पुराने जो भी थे सब भूल गया हूँ,
मुझ को ऐसी नई छुअन ने घेर रखा है

घिरा हुआ हूँ उस की यादों से कुछ ऐसे,
जैसे कमरे को चिलमन ने घेर रखा है

अक्सर अपने ही साए से घबराता है,
दर्पन को अब के 'दर्पन' ने घेर रखा है

दर्पन

— Darpan

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