एक अनजाने ख़ालीपन ने घेर रखा है
मुझको अजीब से दुश्मन ने घेर रखा है
कुछ को तो दुनिया भर की सब आज़ादी है,
कुछ को अपने ही आँगन ने घेर रखा है
लम्स पुराने जो भी थे सब भूल गया हूँ,
मुझको ऐसी नई छुअन ने घेर रखा है
घिरा हुआ हूँ उसकी यादों से कुछ ऐसे,
जैसे कमरे को चिलमन ने घेर रखा है
अक्सर अपने ही साए से घबराता है,
दर्पन को अब के 'दर्पन' ने घेर रखा है
दर्पन
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