आज फिर दिल ने तमाशा कर दिया
क्या नफ़ा है कौन है नुक़सान-देह
मैं ने हर हासिल को बाशा कर दिया
लुत्फ़ ख़ुश-फ़हमी का लेना था मगर
ये ख़ता भी बेतहाशा कर दिया
ज़िंदगी ज़ौक़-ए-तमाशा बन गई
ख़्वाब ने दिल को बताशा कर दिया
— Vishnu Dope
क्या नफ़ा है कौन है नुक़सान-देह
मैं ने हर हासिल को बाशा कर दिया
लुत्फ़ ख़ुश-फ़हमी का लेना था मगर
ये ख़ता भी बेतहाशा कर दिया
ज़िंदगी ज़ौक़-ए-तमाशा बन गई
ख़्वाब ने दिल को बताशा कर दिया
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