आज तो आग लगाए कोईढूँढ़े परवाना सराए कोईआज निय्यत है बड़ी ही ज़ालिमदाग़ बे-लाग लगाए कोईशौक़ हम को है नशे का साक़ीआँखों से भी तो पिलाए कोईयाद आसानी से आ जाते हैंजो जतन कर के भुलाए कोईदर बदर ख़ाक बसर करता हूँकाश मंज़िल भी बताए कोई— Vishnu Dope