तुझ सेे वाबस्ता कोई ग़म नहीं रखने वाले
जिस को रखना हो रक्खे हम नहीं रखने वाले
अपने उलझे हुए बालों की क़सम हम इस बार
तेरी ज़ुल्फ़ों में कोई ख़म नहीं रखने वाले
एक हव्वा की मुहब्बत के सिवा सीने में
और कुछ हज़रत-ए-अदम नहीं रखने वाले
— Abhishek shukla
जिस को रखना हो रक्खे हम नहीं रखने वाले
अपने उलझे हुए बालों की क़सम हम इस बार
तेरी ज़ुल्फ़ों में कोई ख़म नहीं रखने वाले
एक हव्वा की मुहब्बत के सिवा सीने में
और कुछ हज़रत-ए-अदम नहीं रखने वाले
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