लोग बारिश को भिगोने का हुनर रखते हैं
हम समुंदर को सुखाने का जिगर रखते हैं
हमें बर्बाद हसीनों ने किया वरना हम
आसमानों को झुकाने का हुनर रखते हैं
दुनिया लोगों को गिराने का हुनर रखती है
और हम सब को उठाने का हुनर रखते हैं
मुझे इक बात बता दे मैं जिधर जाता हूँ
क्यूँ सभी लोग क़दम अपने उधर रखते हैं
क्या सभी लोग तिरे शहर में पागल हैं प्रशांत
क्यूँ छुपाते हैं मिरे ज़ख़्म किधर रखते हैं
— Prashant Kumar















