टूट जाए न भरम होंठ हिलाऊँ कैसे
हाल जैसा भी है लोगों को बताऊँ कैसे
खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है
मैं तेरे ग़म को ज़माने से छुपाऊँ कैसे
तू ही बतला मेरी यादों को भुलाने वाले
मैं तेरी याद को इस दिल से भुलाऊँ कैसे
फूल होता तो तेरे दर पे सजा भी रहता
ज़ख़्म ले कर तेरी दहलीज़ पे आऊँ कैसे
तेरी सूरत ही मेरी आँख का सरमाया है
तेरे चेहरे से निगाहों को हटाऊँ कैसे
वो रुलाता है रुलाए मुझे जी भर के 'अदीम'
मेरी आँखें हैं वो मैं उस को रुलाऊँ कैसे
As you were reading Shayari by Adeem Hashmi
our suggestion based on Adeem Hashmi
As you were reading undefined Shayari