आप भी चल दिए याद भी आप की
मुझ को खाती रही फिर कमी आप की
हाए क़िस्मत ने कैसा सितम ये किया
दोस्ती भी नहीं अब बची आप की
इस से बेहतर है मिलने नहीं आइए
जानलेवा है ये ख़ामुशी आप की
बे-वफ़ाई पे दुनिया ये जो भी कहे
पर समझता हूँ मैं बेबसी आप की
इस से बढ़कर तो क्या ही मैं अर्पित करूँ
ज़िंदगी आप की शा'इरी आप की
— Aditya Choudhary















