tum hamaare ho ham tumhaare hain | तुम हमारे हो हम तुम्हारे हैं

  - Afzal Allahabadi

तुम हमारे हो हम तुम्हारे हैं
जैसे दरिया के दो किनारे हैं

रूठे रूठे से सब नज़ारे हैं
इक हमें हैं जो ग़म के मारे हैं

वो मिलाते हैं नज़र हम से
और कहते हैं हम तुम्हारे हैं

हौसला है हमारे दिल में अभी
हम कहाँ ज़िंदगी से हारे हैं

क्या बताएँ कि तेरी फ़ुर्क़त में
किस तरह हम ने दिन गुज़ारे हैं

उस को मेरी कभी सताए क्यूँँ
जिस के दामन में चाँद तारे हैं

हम को 'अफ़ज़ल' है आसरा उस का
कैसे कह दें कि बे-सहारे हैं

  - Afzal Allahabadi

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