darakhton ne kaha akmal banaa do | दरख़्तों ने कहा अकमल बना दो

  - Afzal Sultanpuri

दरख़्तों ने कहा अकमल बना दो
हटा दो शहर को जंगल बना दो

मुझे चाहत तिरी है बस तिरी है
मुझे मिलकर कभी पागल बना दो

हमारे प्यार में ख़ुश्बू बहुत है
हमारे प्यार को संदल बना दो

अभी तो होश में आना नहीं है
चलो तुम और दो बोतल बना दो

रहे हो क़त्ल में शामिल हमारे
जहाँँ भर को चलो मक़्तल बना दो

कि हमको मार दो प्यासे यहाँँ पर
यज़ीदी कौम हो कर्बल बना दो

हमें सब याद आख़िर में करेंगें
भले हमको अभी अव्वल बना दो

बुरा हूँँ मैं यहाँँ दुनिया कि ख़ातिर
अगर तुम कर सको अफ़ज़ल बना दो

  - Afzal Sultanpuri

Promise Shayari

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