तेरे पैरों की पायल से कभी घायल हुआ था मैं
तेरी आँखों की हरक़त से कभी पागल हुआ था मैं
मुझे गर होश आएगा करूँँगा बात मैं ख़ुद से
इसी ही सोच में हूँगा कभी बेकल हुआ था मैं
परेशाँ भी मेरा होना समझ ले बेमुनासिब था
लगी है लत शराबों की कभी अफ़ज़ल हुआ था मैं
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