दरख़्तों ने कहा अकमल बना दो
हटा दो शहर को जंगल बना दो
मुझे चाहत तिरी है बस तिरी है
मुझे मिलकर कभी पागल बना दो
हमारे प्यार में ख़ुश्बू बहुत है
हमारे प्यार को संदल बना दो
अभी तो होश में आना नहीं है
चलो तुम और दो बोतल बना दो
रहे हो क़त्ल में शामिल हमारे
जहाँँ भर को चलो मक़्तल बना दो
कि हमको मार दो प्यासे यहाँँ पर
यज़ीदी कौम हो कर्बल बना दो
हमें सब याद आख़िर में करेंगें
भले हमको अभी अव्वल बना दो
बुरा हूँँ मैं यहाँँ दुनिया कि ख़ातिर
अगर तुम कर सको अफ़ज़ल बना दो
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