इश्क़ कर नहीं रहे
फिर भी मर नहीं रहे
मेरी बस्तियों के घर
मेरे घर नहीं रहे
तेरी बारिशों से भी
मटके भर नहीं रहे
आदतन ख़मोश हैं
तुझ से डर नहीं रहे
छुट्टी वाले दिन भी हम
अपने घर नहीं रहे
— Ahmad Azeem
फिर भी मर नहीं रहे
मेरी बस्तियों के घर
मेरे घर नहीं रहे
तेरी बारिशों से भी
मटके भर नहीं रहे
आदतन ख़मोश हैं
तुझ से डर नहीं रहे
छुट्टी वाले दिन भी हम
अपने घर नहीं रहे
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