दीदा-ए-यार ने बर्बाद किया है मुझको
था बहुत शाद कि ना-शाद किया है मुझको
पेड़ तो पेड़ यहाँ लोगों में भी जान नहीं
तूने किस शहर में आज़ाद किया है मुझको
मुझ
में भी अम्न बसा करती थी पहले पहले
मेरे हालात ने जल्लाद किया है मुझको।
तुझको क्या इल्म हो, क्या हाल हुआ है तिरे बाद
तेरी यादों ने बहुत याद किया है मुझको
तू मिरे सब्र के दर्जात की तस्दीक न कर
एक गाने ने भी ना-शाद किया है मुझको
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