याद अब भी अपनी वो यादें तो करती होगी
ख़ुद से अब तन्हाई में बातें तो करती होगी
याद तो करते हैं माज़ी को अपने सभी ही
वो सहेली से मिरी बातें तो करती होगी
साथ जीने और फना साथ होने को लेकर
वो रक़ीबों से ये सब बातें तो करती होगी
कैसे मुमकिन है कि ख़ाली जगह न भरी हो
वो किसी और से मुलाक़ातें तो करती होगी
मेरी धड़कन में नहीं कोई तेरे सिवा बस
वो नए आशिक़ से ये बातें तो करती होगी
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