zindagi bhi vaba lagii hai mujhe | ज़िंदगी भी वबा लगी है मुझे

  - Faiz Ahmad

ज़िंदगी भी वबा लगी है मुझे
साँस लेना सज़ा लगी है मुझे

जिए जाने का दिल नहीं करता
एक लड़की क़ज़ा लगी है मुझे

किसी को चैन मिल रहा है मिरा
किसी की चोट आ लगी है मुझे

मुझे तुझ सेे जुदा किए देना
उस खु़दा की ख़ता लगी है मुझे

देख कर आज उसे किसी के साथ
किसी की याद आ लगी है मुझे

इक तिरा मर्ज़ है जो जाता नहीं
गो दवा तो सब आ लगी है मुझे

इक ही आदत है मैकशी की मुझे
एक आदत भी क्या लगी है मुझे

उसके नज़दीक तो वो कुछ भी नहीं
जो मुहब्बत खु़दा लगी है मुझे

मेरी बे-कारी का सबब मत पूछ
किसी की बद्दुआ लगी है मुझे

जिस जगह छोड़ कर गई थी वो
वो ज़मीं करबला लगी है मुझे

  - Faiz Ahmad

Qaid Shayari

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