yuñ bhi raas aayi nahin us ki vafaa tum rakh lo | यूँँ भी रास आई नहीं उस की वफ़ा तुम रख लो

  - Aisha Ayyub

यूँँ भी रास आई नहीं उस की वफ़ा तुम रख लो
मुझ को बीमार ही रहने दो दवा तुम रख लो

बंद कमरों की घुटन मेरे लिए रहने दो
ये जो आती है दरीचों से हवा तुम रख लो

मेरी राहों में बिछा दो तुम अँधेरे सारे
और ये लो मिरे हिस्से का दिया तुम रख लो

ओढ़ कर बैठ गई हूँ मैं दुखों की चादर
ये ख़ुशी और ये ख़ुशबू-ए-क़बा तुम रख लो

मुझ को ये नूर-ए-क़मर तीरगी से हासिल है
मेरे अंदर से जो निकली है ज़िया तुम रख लो

पास बैठे कोई दिल खोल के दो बात करे
बाक़ी दुनिया के ये अतवार-ओ-अदा तुम रख लो

मेरी माँ तो मिरी जन्नत को लिए बैठी है
ऐसा कर लो मिरे पुरखों की दुआ तुम रख लो

मैं गुनहगार ही अच्छी हूँ बरा-ए-महफ़िल
ये जो तुम बेचते फिरते हो ख़ुदा तुम रख लो

  - Aisha Ayyub

Khushboo Shayari

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