"सपना"
दूर कहीं पर घर अपना था
कल देखा एक सपना था
सर्दियों की रात में हल्की हल्की बारिश से
ठंडे पड़े कमरे के बिस्तर पर बैठ कर तुम
शर्मा शर्मा कर अपने चूड़ी वाले हाथों से
मेरी आँखें बंद करने की कोशिश कर रही थी
तेरी गोद में मैं अपना सर रख कर
साइंटिस्ट बन कर बग़ैर टेलिस्कोप के
मोबाइल के फ़्लैश से तुम्हारी आँखों के स्पेस में
प्लैनेट खोजने की कोशिश कर रहा था
— AKASH















