अम्न में हिस्सा छोड़ चुका हूँ
एक परिंदा छोड़ चुका हूँ
वक़्त किसी का कब होता है
वक़्त का रोना छोड़ चुका हूँ
मेरे हिस्से आता भी क्या
अपना हिस्सा छोड़ चुका हूँ
उम्मीदों के सीने पर अब
सर को रखना छोड़ चुका हूँ
तुम सिगरेट की बात करो हो
मैं तो जीना छोड़ चुका हूँ
— Aks samastipuri















