bahut mushkil hua rastaa hamaara | बहुत मुश्किल हुआ रस्ता हमारा

  - Aks samastipuri

बहुत मुश्किल हुआ रस्ता हमारा
जब उस ने खो दिया नक़्शा हमारा

मिला जब रौशनी से मुद्दतों बाद
लिपट कर रो पड़ा साया हमारा

बहुत महदूद है दुनिया हमारी
नहीं निभ पाएगा रिश्ता हमारा

अगरचे कोई भी आता नहीं था
खुला रहता था दरवाज़ा हमारा

नहीं इस में मोहब्बत के सिवा कुछ
बहुत है मुख़्तसर क़िस्सा हमारा

हमारी कोई क़ीमत ही नहीं है
नहीं कर पाओगे सौदा हमारा

न जाने कौन दस्तक दे गया है
न जाने कौन है अपना हमारा

तुम्हें अपना बनाया बोल कर झूट
कहो कैसा लगा धोका हमारा

  - Aks samastipuri

Kahani Shayari

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