ik hijrat ki aawazon ka | इक हिजरत की आवाज़ों का

  - Ali Zaryoun

इक हिजरत की आवाज़ों का
कोई बैन सुने दरवाज़ों का

ज़करिय्या पेड़ों की मत सुन
ये जंगल है ख़मयाज़ों का

तिरे सर में सोज़ नहीं प्यारे
तू अहल नहीं मिरे साज़ों का

औरों को सलाहें देता है
कोई डसा हुआ अंदाज़ों का

मिरा नख़रा करना बनता है
मैं ग़ाज़ी हूँ तिरे गाज़ों का

इक रेढ़ी वाला मुंकिर है
तिरी तोपों और जहाज़ों का

  - Ali Zaryoun

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