chadar ki izzat karta hoon aur parde ko maanta hoon | चादर की इज्जत करता हूं और पर्दे को मानता हूं

  - Ali Zaryoun

चादर की इज्जत करता हूं और पर्दे को मानता हूं
हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूं

सारे मर्द एक जैसे हैं तुमने कैसे कह डाला
मैं भी तो एक मर्द हूं तुमको खुद से बेहतर मानता हूं

मैंने उससे प्यार किया है मिल्कियत का दावा नहीं
वो जिसके भी साथ है मैं उसको भी अपना मानता हूं

चादर की इज्जत करता हूं और पर्दे को मानता हूं
हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूं

  - Ali Zaryoun

Naqab Shayari

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