जो कई अरसे से छुपाई है
आज पीड़ा वही सुनाई है
और हर बार की तरह रातें
याद ले अपने साथ आई है
मानने ही नहीं ये वाला मैं
दुनिया ऐसी ख़ुदा बनाई है
मेरा दुख दोस्त था बहुत ज़्यादा
आपने ताली कम बजाई है
प्यार तो और ही किसी से था
और किस से हुई सगाई है
एक दिन बे-हिजाब आई थी
यूँँ लगा बे-लिबास आई है
आ गया इम्तिहान देने मैं
और कुछ की नहीं पढ़ाई है
राख की ज़िंदगी मेरी मैंने
उसकी तस्वीर नइ जलाई है
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