Ambar
Ambar
Ghazal

नए नए जब हम दुनिया में आए थे

थोड़े रोए चीखे और चिल्लाए थे

दुख तो ये है वो ही हम को समझा नईं
जिस को हम ने सारे राज़ बताए थे

पहले कर ली हम से लड़ाई बात न की
अब कहते हैं तुम ही आग लगाए थे

अच्छा माना सारी ग़लती मेरी थी
तुम ही कौन सा जलती आग बुझाए थे

सोचा इक मौक़ा ही दे दूँ लेकिन तुम
कहाँ ख़बर थी ता'ने देने आए थे

' अंबर' अपना कटना बिल्कुल लाज़िम था
पहली बार मुहब्बत में जो आए थे

— Ambar

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