"सालगिरह"कितने ख़्वाब थे दिल मेंऔर कितने अरमाँ सजाए थेहाँ आज वही दिन हैजब तुम ज़िन्दगी में आए थेजगाये थे अरमाँ हबाब सेना सही किताब कुछ बाब सेअब्र-ए-फ़लक ने भीरुख़ किया था मेरी ओरवीरान पड़ी ज़िन्दगी मेंतुम घटाएं बन छाए थेहाँ आज वही दिन हैजब तुम ज़िन्दगी में आए थे— Ambar