अमीर-ए-शहर का तख़्ता पलट भी सकता है
के संग-ए-राह हटाने से हट भी सकता है
हमारे ज़ख़्मी बदन पर अभी न जश्न करो
ये ज़ख़्मी शे'र पलट कर झपट भी सकता है
हमारे जिस्म में काँटे नहीं लगे हैं सुन
कभी कभार तू आ कर लिपट भी सकता है
जवाब जो भी हो मैसज में भेज दे मुझ को
कि लो है बैटरी ये फोन कट भी सकता है
— Amit Jha Rahi















