हयात रहते दिखा लो कमाल मिट्टी का
फिर उस के बा'द तो होना है हाल मिट्टी का
मैं इक कुम्हार हूँ मिट्टी है ज़िंदगी मेरी
ये मेरे आँसू है मिट्टी रुमाल मिट्टी का
जदीद दौर है मंदिर में अब नहीं मिलते
चराग़ मिट्टी के पूजा का थाल मिट्टी का
बनाते वक़्त उसे भी कहाँ ख़बर होगी
उसी की ज़ात पे होगा सवाल मिट्टी का
फिर एक रूह को आना है उस के झाँसे में
के उस ने फिर से बिछाया है जाल मिट्टी का
— Amit Jha Rahi















