in biyaabaanon men basta tha nagar pahle kabhi | इन बयाबानों में बस्ता था नगर पहले कभी

  - Amit Jha Rahi

इन बयाबानों में बस्ता था नगर पहले कभी
बे-घरों का भी हुआ करता था घर पहले कभी

ख़ूब से भी ख़ूबसूरत फूल इस गुलशन में हैं
आप सा देखा नहीं हम ने मगर पहले कभी

उस की गोदी में किसी बच्चे सा सर को रख दिया
वैसे तो झुकता नहीं था अपना सर पहले कभी

उस के पैराहन यक़ीनन खूटियों पर हैं टँगे
यूँँ कहाँ रौशन हुआ था बाम-ओ-दर पहले कभी

हम को भी चसका लगा था इक परी के प्यार का
हम ने भी ग़ज़लें कही थीं हुस्न पर पहले कभी

  - Amit Jha Rahi

Shehar Shayari

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