आया तो मैं भी था मशवरे के लिए
पूछा ही वो नहीं बैठने के लिए
उस से बिछड़े ज़माने हमें हो गए
ये तो डीपी है बस देखने के लिए
फ़ाइदा ये हुआ हार कर उस को अब
कुछ बचा ही नहीं हारने के लिए
इस लिए ख़ुद-कुशी करते हैं लोग ये
रस्ता बचता नहीं लौटने के लिए
— Amit Kumar















