घड़ा अपने हिस्से का भर जाना है
यहाँ एक दिन सब ने मर जाना है
कोई बीच का रस्ता है ज़िंदगी
जो सब को इधर से उधर जाना है
कई बैठा लेंगे मुझे पलकों पे
कई के नज़र से उतर जाना है
ये लगता है दुनिया मुझे घूम के
कि बस जल्द से जल्द घर जाना है
यही डर जो रखता है ज़िंदा मुझे
अमित हम ने इक रोज़ मर जाना है
— Amit Kumar















