सब के गले का मुझ को फंदा लगता है
क्या बात है वो सब को अपना लगता है
होती है चाहत दिल के अंदर जितनी ही
उतना ही कोई शख़्स अच्छा लगता है
फिर तोड़ भी देता है उम्मीदें वही
दुनिया में जो जो शख़्स सच्चा लगता है
अब मौत का कारण न बन जाए मिरी
जो देखने में तुम को पंखा लगता है
मेरी मुकम्मल इस
में दुनिया है 'अमित'
जो देखने में एक कमरा लगता है
— Amit Kumar















