तेरा ये लुत्फ़ किसी ज़ख़्म का उन्वान न हो
ये जो साहिल सा नज़र आता है तूफ़ान न हो
क्या बला शहर पे टूटी है ख़ुदा ख़ैर करे
यूँँ सर-ए-शाम कोई दश्त भी वीरान न हो
रंग ख़ुश्बू से जुदा हो तो बिखर जाता है
देखने वाले मिरे हाल पे हैरान न हो
बात बनती है तो फिर आप ही बन जाती है
इतनी मायूस मुक़द्दर से मिरी जान न हो
सीख इस शहर में जीने का सलीक़ा 'अमजद'
कोई मरता है मरे, आप का नुक़सान न हो
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Amjad Islam Amjad
our suggestion based on Amjad Islam Amjad
As you were reading Rang Shayari Shayari