कोई जब इश्क़ में हद से गुज़र जाए
सितम सहने से बेहतर है कि मर जाए
ये लड़के जो वफ़ा के गीत गाते हैं
सभी की हीर थाने में मुकर जाए
मुझे गर वाकई में देख ले कोई
यक़ीनन फिर मोहब्बत से वो डर जाए
तुझे दुल्हन बना कर के तेरा शौहर
फिर अगली सुब्ह शादी से मुकर जाए
है तुझ को आख़िरी ये बद-दुआ मेरी
जो बेटी हो तेरी वो मेरे पर जाए
यहाँ ईमान जिस का बिक नहीं सकता
उसे बोलो कि कुर्सी से उतर जाए
ये किस फ़ौजी की औरत रो रही अब तक
कहो कुछ भीख ले और अपने घर जाए
यूँ खुल कर के सियासत पे जो लिखता है
कोई 'रेहान' को बोलो सुधर जाए
— Rehaan















