Rehaan
Rehaan
Ghazal

कोई जब इश्क़ में हद से गुज़र जाए

सितम सहने से बेहतर है कि मर जाए

ये लड़के जो वफ़ा के गीत गाते हैं
सभी की हीर थाने में मुकर जाए

मुझे गर वाकई में देख ले कोई
यक़ीनन फिर मोहब्बत से वो डर जाए

तुझे दुल्हन बना कर के तेरा शौहर
फिर अगली सुब्ह शादी से मुकर जाए

है तुझ को आख़िरी ये बद-दुआ मेरी
जो बेटी हो तेरी वो मेरे पर जाए

यहाँ ईमान जिस का बिक नहीं सकता
उसे बोलो कि कुर्सी से उतर जाए

ये किस फ़ौजी की औरत रो रही अब तक
कहो कुछ भीख ले और अपने घर जाए

यूँ खुल कर के सियासत पे जो लिखता है
कोई 'रेहान' को बोलो सुधर जाए

— Rehaan

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