"अफ़सोस-2"
मोहब्बत में तुम्हें जब उम्र भर का साथ चुभता है
अगर ये इश्क़ भी मेरा महज़ इक झूठ लगता है
तुम अपनी शाइरी को भी मेरी ग़लती बताते हो
तो फिर बोलो कि मुझ से तुम मोहब्बत क्यूँ जताते हो
कहो किस हक़ से अब मुझ से कोई भी चाह है तुमको
बताओ क्यूँ मेरी ख़ुशियों की यूँ परवाह है तुम को
चलो छोड़ो कहा तुम ने जो सब कुछ मानती हूँ मैं
मेरा जो हाल होना है ब-ख़ूबी जानती हूँ मैं
मुबारक हो तुम्हारी याद में मैं रोज़ जलती हूँ
मोहब्बत वाकई अफ़सोस है अब मैं समझती हूँ
— Rehaan















